आईसीएआर–केंद्रीय द्वीप कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR–CIARI), श्री विजयपुरम के मत्स्य विज्ञान प्रभाग द्वारा अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के मत्स्य विभाग, कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी (ATMA), दक्षिण अंडमान के सहयोग से “फिनफिश एवं शेलफिश रोग निदान एवं प्रबंधन” विषय पर दो-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दो बैचों का आयोजन 22 से 25 सितंबर 2026 तक किया जा रहा है। प्रथम बैच का प्रशिक्षण 22 सितंबर 2026 को प्रारंभ हुआ, जबकि द्वितीय बैच 25 सितंबर 2026 से प्रारंभ होगा। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम जलीय जंतुओं के रोगों के लिए राष्ट्रीय निगरानी कार्यक्रम (National Surveillance Programme for Aquatic Animal Diseases – NSPAAD) चरण-II के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है।
22 सितंबर 2026 को आयोजित उद्घाटन सत्र में डॉ. जय सुंदर, निदेशक, ICAR–CIARI, ने किसानों के बीच मछली स्वास्थ्य एवं रोग प्रबंधन के संबंध में व्यापक जागरूकता उत्पन्न करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इससे जलीय कृषि की उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ मत्स्य पालन से प्राप्त होने वाले आर्थिक लाभ को भी सुदृढ़ करने में सहायता मिलेगी। उन्होंने द्वीपसमूह की अर्थव्यवस्था तथा पोषण सुरक्षा में मत्स्य क्षेत्र के महत्वपूर्ण योगदान को भी रेखांकित किया।
डॉ. एम. मुरुगानंदम, प्रमुख, मत्स्य विज्ञान प्रभाग, ICAR–CIARI, ने द्वीपों में प्रचलित प्रमुख मत्स्य रोगों तथा आवश्यक मत्स्य स्वास्थ्य प्रबंधन उपायों का अवलोकन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि आहार एवं पोषण संबंधी समस्याओं के अतिरिक्त रोग एवं अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ भी जलीय कृषि उत्पादन को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने मत्स्य बीज, आहार तथा अन्य जलीय कृषि संबंधी इनपुट के प्रवेश के समय उचित क्वारंटीन एवं जैव-सुरक्षा उपायों को अपनाने पर विशेष जोर दिया, ताकि परजीवी, विषाणु, जीवाणु तथा कवकीय रोगजनकों के जलीय कृषि प्रणालियों में प्रवेश के जोखिम को न्यूनतम किया जा सके।
डॉ. जे. प्रवीणराज, पाठ्यक्रम निदेशक एवं प्रधान अन्वेषक, NSPAAD चरण-II, ICAR–CIARI, ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की तथा ICAR–CIARI एवं राष्ट्रीय स्तर पर जलीय जंतु रोगों के निदान एवं निगरानी के क्षेत्र में चल रहे अनुसंधान तथा तकनीकी प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने मत्स्य रोगों की घटनाओं की रिपोर्टिंग के लिए विकसित समर्पित मोबाइल एप्लिकेशन का भी परिचय कराया। इस एप्लिकेशन के माध्यम से रोग संबंधी जानकारी राष्ट्रीय डेटाबेस में भेजी जा सकती है तथा रोगों के निदान एवं प्रबंधन के लिए तकनीकी सहायता प्राप्त की जा सकती है।
डॉ. आर. किरुबासंकर, वरिष्ठ वैज्ञानिक, ICAR–CIARI, ने द्वीपसमूह में मत्स्य क्षेत्र की संभावनाओं तथा मत्स्य रोगों के कारण उत्पादन एवं उत्पादकता पर पड़ने वाले प्रभावों पर व्याख्यान दिया। डॉ. जेस मारिया विल्सन, वैज्ञानिक, ICAR–CIARI, ने रोगों के प्रकोप को रोकने तथा उत्पादन हानि को कम करने में जल गुणवत्ता प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डाला। श्री चित्तरंजन राउल, वैज्ञानिक, ICAR–CIARI, ने उन्नत मत्स्य पालन तकनीकों एवं प्रबंधन पद्धतियों के बारे में जानकारी दी, जो रोगों की घटनाओं तथा उनसे संबंधित स्वास्थ्य प्रबंधन समस्याओं को कम करने में सहायक हैं।
श्री ई. ए. नेस्नास, सहायक निदेशक, मत्स्य विभाग, अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह, ने मत्स्य किसानों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करने में मत्स्य विभाग और ICAR–CIARI के बीच सहयोगात्मक प्रयासों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ICAR–CIARI की अनुसंधान प्रयोगशालाओं एवं क्षेत्रीय सुविधाओं से किसानों को उभरती प्रौद्योगिकियों, रोग निदान की आधुनिक विधियों तथा रोगों की घटनाओं को कम करने और जलीय कृषि स्वास्थ्य प्रबंधन में सुधार के लिए क्षेत्र-स्तरीय दिशा-निर्देशों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त होगा।
प्रथम बैच में 19 मत्स्य किसानों, जिनमें हाथीपहाड़ क्षेत्र के 14 पुरुष प्रतिभागी शामिल थे, ने प्रशिक्षण में भाग लिया। इनके साथ ATMA के सदस्य तथा सागर मित्र भी प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल हुए। प्रशिक्षण का उद्देश्य मत्स्य किसानों के ज्ञान एवं व्यावहारिक कौशल को बढ़ाना तथा संवर्धित फिनफिश एवं शेलफिश में होने